फिलिप हित्ती

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  • सच्ची शरियत
  • इसलामी शरियत धार्मिक और संसारिक के बीच कोई अंतर नही रखती। बल्कि वह तो अल्लाह के साथ मनुष्यके रिश्ते को, और अल्लाह के ओर मनुष्य के कर्तव्य को बताती है, और इन रिश्तों को व्यवस्थित करती है, जैसा कि इसलामी शरियत मनुष्यों का दूसरे मनुष्यं से रिश्ता जोडती है। अल्लाह के सारे आदेश और रोक जो धार्मिक, सामाजिक और इसके अलावा जिस किसी भी चीज़ से संबंधित हो वह सबके सब क़ुरआन में मौजूद हैं। जिस मे से लग भग 6000 या इससे कुछ अधिक आयतें हैं। जिसमे से लगभग 1000 आयतें विधान से संबंधित हैं।











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