रोबट् मोरेस बिग

img_alt6

40
  • व्यक्तित्व की भावना
  • वह ईश्वर जिसके वजूद को हम मानते है, वह भोतिकवाद संसार से संबंध नही है, और न हमारी सिमित ज्ञानेंद्रीय उस ईश्वर को महसूस कर सकती हैं। इसीकारण यह विफल प्रयत्न है कि ईश्वर के वजूद के प्रमाण के लिए प्राकृतिक ज्ञान का प्रयोग किया जाय, इसलिए कि ईशवर के पजूद कि सीमा प्राकृतिक ज्ञान की तंग सीमा से अलग है। निश्चित रुप से ईश्वर के वजूद पर विश्वास करना एक निजी व्यवहार है जो मानव के अंतःकरण व भावनाओं में जन्म लेती है और निजी अनुभवों में बढ़ती है।











सुंन्दरता और प्रणाली