धर्म ही जीवन है

धर्म ही जीवन है

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मनुष्य के लिए धर्म एक प्राकृतिक आवश्यक मानव वैधता है। और हमारे लिए ये बताना पर्याप्त होगा कि मानव को धर्म की आवश्यकता आध्यात्मिक निराशा कि ओर ले जाता है। जिसके कारण मनुष्य ऐसी जगह धार्मिक सुकून प्राप्त करने का प्रयास करता है। जहाँ से उसे कुछ भी प्राप्त नही होता।





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ईशवर वह है जिसका कोई साझी नही