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इसी तरह उनसे पहले लोगों के पास जो पैग़म्बर आता तो वह उसको जादूगर कहते या सिड़ी दीवाना (बताते)

ये लोग एक दूसरे को ऐसी बात की वसीयत करते आते हैं (नहीं) बल्कि ये लोग हैं ही सरकश

तो (ऐ रसूल) तुम इनसे मुँह फेर लो तुम पर तो कुछ इल्ज़ाम नहीं है

और नसीहत किए जाओ क्योंकि नसीहत मोमिनीन को फायदा देती है

और मैने जिनों और आदमियों को इसी ग़रज़ से पैदा किया कि वह मेरी इबादत करें

न तो मैं उनसे रोज़ी का तालिब हूँ और न ये चाहता हूँ कि मुझे खाना खिलाएँ

ख़ुदा ख़ुद बड़ा रोज़ी देने वाला ज़ोरावर (और) ज़बरदस्त है

तो (इन) ज़ालिमों के वास्ते भी अज़ाब का कुछ हिस्सा है जिस तरह उनके साथियों के लिए हिस्सा था तो इनको हम से जल्दी न करनी चाहिए

तो जिस दिन का इन काफ़िरों से वायदा किया जाता है इससे इनके लिए ख़राबी है

(कोहे) तूर की क़सम

और उसकी किताब (लौहे महफूज़) की

जो क़ुशादा औराक़ में लिखी हुई है

और बैतुल मामूर की (जो काबा के सामने फरिश्तों का क़िब्ला है)

और ऊँची छत (आसमान) की

और जोश व ख़रोश वाले समन्दर की

कि तुम्हारे परवरदिगार का अज़ाब बेशक वाकेए होकर रहेगा

(और) इसका कोई रोकने वाला नहीं

जिस दिन आसमान चक्कर खाने लगेगा

और पहाड़ उड़ने लगेंगे

तो उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है

जो लोग बातिल में पड़े खेल रहे हैं

जिस दिन जहन्नुम की आग की तरफ उनको ढकेल ढकेल ले जाएँगे

(और उनसे कहा जाएगा) यही वह जहन्नुम है जिसे तुम झुठलाया करते थे