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और हमारा हुक्म तो बस ऑंख के झपकने की तरह एक बात होती है

और हम तुम्हारे हम मशरबो को हलाक कर चुके हैं तो कोई है जो नसीहत हासिल करे

और अगर चे ये लोग जो कुछ कर चुके हैं (इनके) आमाल नामों में (दर्ज) है

(यानि) हर छोटा और बड़ा काम लिख दिया गया है

बेशक परहेज़गार लोग (बेहिश्त के) बाग़ों और नहरों में

(यानि) पसन्दीदा मक़ाम में हर तरह की कुदरत रखने वाले बादशाह की बारगाह में (मुक़र्रिब) होंगे

बड़ा मेहरबान (ख़ुदा)

उसी ने क़ुरान की तालीम फरमाई

उसी ने इन्सान को पैदा किया

उसी ने उनको (अपना मतलब) बयान करना सिखाया

सूरज और चाँद एक मुक़र्रर हिसाब से चल रहे हैं

और बूटियाँ बेलें, और दरख्त (उसी को) सजदा करते हैं

और उसी ने आसमान बुलन्द किया और तराजू (इन्साफ) को क़ायम किया

ताकि तुम लोग तराज़ू (से तौलने) में हद से तजाउज़ न करो

और ईन्साफ के साथ ठीक तौलो और तौल कम न करो

और उसी ने लोगों के नफे क़े लिए ज़मीन बनायी

कि उसमें मेवे और खजूर के दरख्त हैं जिसके ख़ोशों में ग़िलाफ़ होते हैं

और अनाज जिसके साथ भुस होता है और ख़ुशबूदार फूल

तो (ऐ गिरोह जिन व इन्स) तुम दोनों अपने परवरदिगार की कौन कौन सी नेअमतों को न मानोगे

उसी ने इन्सान को ठीकरे की तरह खन खनाती हुई मिटटी से पैदा किया

और उसी ने जिन्नात को आग के शोले से पैदा किया

तो (ऐ गिरोह जिन व इन्स) तुम अपने परवरदिगार की कौन कौन सी नेअमतों से मुकरोगे

वही जाड़े गर्मी के दोनों मशरिकों का मालिक है और दोनों मग़रिबों का (भी) मालिक है

तो (ऐ जिनों) और (आदमियों) तुम अपने परवरदिगार की किस किस नेअमत से इन्कार करोगे