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कि बेशक ये बड़े रूतबे का क़ुरान है

जो किताब (लौहे महफूज़) में (लिखा हुआ) है

इसको बस वही लोग छूते हैं जो पाक हैं

सारे जहाँ के परवरदिगार की तरफ से (मोहम्मद पर) नाज़िल हुआ है

तो क्या तुम लोग इस कलाम से इन्कार रखते हो

और तुमने अपनी रोज़ी ये करार दे ली है कि (उसको) झुठलाते हो

तो क्या जब जान गले तक पहुँचती है

और तुम उस वक्त (क़ी हालत) पड़े देखा करते हो

और हम इस (मरने वाले) से तुमसे भी ज्यादा नज़दीक होते हैं लेकिन तुमको दिखाई नहीं देता

तो अगर तुम किसी के दबाव में नहीं हो

तो अगर (अपने दावे में) तुम सच्चे हो तो रूह को फेर क्यों नहीं देते

पस अगर वह (मरने वाला ख़ुदा के) मुक़र्रेबीन से है

तो (उस के लिए) आराम व आसाइश है और ख़ुशबूदार फूल और नेअमत के बाग़

और अगर वह दाहिने हाथ वालों में से है

तो (उससे कहा जाएगा कि) तुम पर दाहिने हाथ वालों की तरफ़ से सलाम हो

और अगर झुठलाने वाले गुमराहों में से है

तो (उसकी) मेहमानी खौलता हुआ पानी है

और जहन्नुम में दाखिल कर देना

बेशक ये (ख़बर) यक़ीनन सही है

तो (ऐ रसूल) तुम अपने बुज़ुर्ग परवरदिगार की तस्बीह करो

जो जो चीज़ सारे आसमान व ज़मीन में है सब ख़ुदा की तसबीह करती है और वही ग़ालिब हिकमत वाला है

सारे आसमान व ज़मीन की बादशाही उसी की है वही जिलाता है वही मारता है और वही हर चीज़ पर कादिर है

वही सबसे पहले और सबसे आख़िर है और (अपनी क़ूवतों से) सब पर ज़ाहिर और (निगाहों से) पोशीदा है और वही सब चीज़ों को जानता