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जिस दिन जिबरील और फरिश्ते (उसके सामने) पर बाँध कर खड़े होंगे (उस दिन) उससे कोई बात न कर सकेगा मगर जिसे ख़ुदा इजाज़त दे और वह ठिकाने की बात कहे

वह दिन बरहक़ है तो जो शख़्श चाहे अपने परवरदिगार की बारगाह में (अपना) ठिकाना बनाए

हमने तुम लोगों को अनक़रीब आने वाले अज़ाब से डरा दिया जिस दिन आदमी अपने हाथों पहले से भेजे हुए (आमाल) को देखेगा और काफ़िर कहेगा काश मैं ख़ाक हो जाता

उन (फ़रिश्तों) की क़सम

जो (कुफ्फ़ार की रूह) डूब कर सख्ती से खींच लेते हैं

और उनकी क़सम जो (मोमिनीन की जान) आसानी से खोल देते हैं

और उनकी क़सम जो (आसमान ज़मीन के दरमियान) पैरते फिरते हैं

फिर एक के आगे बढ़ते हैं

फिर (दुनिया के) इन्तज़ाम करते हैं (उनकी क़सम) कि क़यामत हो कर रहेगी

जिस दिन ज़मीन को भूचाल आएगा फिर उसके पीछे और ज़लज़ला आएगा

उस दिन दिलों को धड़कन होगी

उनकी ऑंखें (निदामत से) झुकी हुई होंगी

कुफ्फ़ार कहते हैं कि क्या हम उलटे पाँव (ज़िन्दगी की तरफ़) फिर लौटेंगे

क्या जब हम खोखल हड्डियाँ हो जाएँगे

कहते हैं कि ये लौटना तो बड़ा नुक़सान देह है

वह (क़यामत) तो (गोया) बस एक सख्त चीख़ होगी

और लोग शक़ बारगी एक मैदान (हश्र) में मौजूद होंगे

(ऐ रसूल) क्या तुम्हारे पास मूसा का किस्सा भी पहुँचा है

जब उनको परवरदिगार ने तूवा के मैदान में पुकारा

बेशक परहेज़गारों के लिए बड़ी कामयाबी है

(यानि बेहश्त के) बाग़ और अंगूर

और वह औरतें जिनकी उठती हुई जवानियाँ

और बाहम हमजोलियाँ हैं और शराब के लबरेज़ साग़र

और शराब के लबरेज़ साग़र वहाँ न बेहूदा बात सुनेंगे और न झूठ

(ये) तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से काफ़ी इनाम और सिला है

जो सारे आसमान और ज़मीन और जो इन दोनों के बीच में है सबका मालिक है बड़ा मेहरबान लोगों को उससे बात का पूरा न होगा