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तो हम उसे सख्ती (जहन्नुम) में पहुँचा देंगे,

और जब वह हलाक होगा तो उसका माल उसके कुछ भी काम न आएगा

हमें राह दिखा देना ज़रूर है

और आख़ेरत और दुनिया (दोनों) ख़ास हमारी चीज़े हैं

तो हमने तुम्हें भड़कती हुई आग से डरा दिया

उसमें बस वही दाख़िल होगा जो बड़ा बदबख्त है

जिसने झुठलाया और मुँह फेर लिया और जो बड़ा परहेज़गार है

वह उससे बचा लिया जाएगा

जो अपना माल (ख़ुदा की राह) में देता है ताकि पाक हो जाए

और लुत्फ ये है कि किसी का उस पर कोई एहसान नहीं जिसका उसे बदला दिया जाता है

बल्कि (वह तो) सिर्फ अपने आलीशान परवरदिगार की ख़ुशनूदी हासिल करने के लिए (देता है)

और वह अनक़रीब भी ख़ुश हो जाएगा

(ऐ रसूल) पहर दिन चढ़े की क़सम

और रात की जब (चीज़ों को) छुपा ले

कि तुम्हारा परवरदिगार न तुमको छोड़ बैठा और (न तुमसे) नाराज़ हुआ

और तुम्हारे वास्ते आख़ेरत दुनिया से यक़ीनी कहीं बेहतर है

और तुम्हारा परवरदिगार अनक़रीब इस क़दर अता करेगा कि तुम ख़ुश हो जाओ

क्या उसने तुम्हें यतीम पाकर (अबू तालिब की) पनाह न दी (ज़रूर दी)

और तुमको एहकाम से नावाकिफ़ देखा तो मंज़िले मक़सूद तक पहुँचा दिया

और तुमको तंगदस्त देखकर ग़नी कर दिया

तो तुम भी यतीम पर सितम न करना

माँगने वाले को झिड़की न देना

और अपने परवरदिगार की नेअमतों का ज़िक्र करते रहना

(ऐ रसूल) क्या हमने तुम्हारा सीना इल्म से कुशादा नहीं कर दिया (जरूर किया)

और तुम पर से वह बोझ उतार दिया