islamkingdomfaceBook islamkingdomyoutube


भला देखो तो कि अगर उसने (सच्चे को) झुठला दिया और (उसने) मुँह फेरा

(तो नतीजा क्या होगा) क्या उसको ये मालूम नहीं कि ख़ुदा यक़ीनन देख रहा है

देखो अगर वह बाज़ न आएगा तो हम परेशानी के पट्टे पकड़ के घसीटेंगे

झूठे ख़तावार की पेशानी के पट्टे

तो वह अपने याराने जलसा को बुलाए हम भी जल्लाद फ़रिश्ते को बुलाएँगे

(ऐ रसूल) देखो हरगिज़ उनका कहना न मानना

और सजदे करते रहो और कुर्ब हासिल करो (19) (सजदा)

हमने (इस कुरान) को शबे क़द्र में नाज़िल (करना शुरू) किया

और तुमको क्या मालूम शबे क़द्र क्या है

शबे क़द्र (मरतबा और अमल में) हज़ार महीनो से बेहतर है

इस (रात) में फ़रिश्ते और जिबरील (साल भर की) हर बात का हुक्म लेकर अपने परवरदिगार के हुक्म से नाज़िल होते हैं

ये रात सुबह के तुलूअ होने तक (अज़सरतापा) सलामती है

अहले किताब और मुशरिकों से जो लोग काफिर थे जब तक कि उनके पास खुली हुई दलीलें न पहुँचे वह (अपने कुफ्र से) बाज़ आने वाले न थे

(यानि) ख़ुदा के रसूल जो पाक औराक़ पढ़ते हैं (आए और)

उनमें (जो) पुरज़ोर और दरूस्त बातें लिखी हुई हैं (सुनाये)

अहले किताब मुताफ़र्रिक़ हुए भी तो जब उनके पास खुली हुई दलील आ चुकी

(तब) और उन्हें तो बस ये हुक्म दिया गया था कि निरा ख़ुरा उसी का एतक़ाद रख के बातिल से कतरा के ख़ुदा की इबादत करे और पाबन्दी से नमाज़ पढ़े और ज़कात अदा करता रहे और यही सच्चा दीन है