सच्चे ईमान में रूहों का जीवन और अधिक प्रसन्नतायें हैं
सर्वशक्तिमान अल्लाह पर ईमान लाने में ही आत्मा (रूह) की खुशी है,ईमान न लाने वाली आत्मा डरी हुयी भटकी और कमज़ोर रहती है जिसे स्थिरता प्राप्त नहीं होती,और अल्लाह पर ईमान लाने में ही मुक्ति (निजात) है,इस का अर्थ हैः सच्चा विश्वास रखना कि अल्लाह तआला ही हर चीज़ का रब,बादशाह और पैदा करने वाला है, वही इस बात का हक़दार है कि संपूर्ण इबादतें जैसे नमाज़, रोज़ा, दुआ, आशा,डर,हीनता (जि़ल्लत) नम्रता उसी के योग्य हैं,और उस में संपूर्ण विशेषतायें पाई जाती हैं,वह सर्वशक्तिमान अल्लाह हर दोष और हर कमी से पवित्र है।

सच्चे ईमान में रूहों का जीवन और अधिक प्रसन्नतायें हैं सर्वशक्तिमान अल्लाह पर ईमान लाने में ही आत्मा (रूह) की खुशी है,ईमान न लाने वाली आत्मा डरी हुयी भटकी और कमज़ोर रहती है जिसे स्थिरता प्राप्त नहीं होती,और अल्लाह पर ईमान लाने में ही मुक्ति (निजात) ह ...

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